शामली में सर्पदंश के 147 मामले, एंटी-वेनम से 145 लोगों की बची जान; दो की मौत

Health India

Posted by admin on 2026-09-14 06:22:35 |

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शामली में सर्पदंश के 147 मामले, एंटी-वेनम से 145 लोगों की बची जान; दो की मौत

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में इस साल सांप के काटने के मामलों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। जिला अस्पताल में जनवरी से लेकर 13 सितंबर 2026 तक सर्पदंश के कुल 147 मामले सामने आए। इनमें से 145 मरीजों की जान समय पर इलाज और एंटी-वेनम दिए जाने से बचाई जा सकी, जबकि दो लोगों की मौत हो गई।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बारिश के मौसम में सांप के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। खासकर जुलाई और अगस्त के दौरान अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। डॉक्टरों का कहना है कि बरसात के दौरान सांप अपने ठिकानों से बाहर निकलते हैं, जिससे खेतों, घरों और आसपास के इलाकों में सर्पदंश का खतरा बढ़ जाता है।

अगस्त में सबसे ज्यादा मामले

जिला अस्पताल में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में सर्पदंश का सिर्फ एक मामला सामने आया था। फरवरी में दो और मार्च में आठ मरीज अस्पताल पहुंचे। अप्रैल में सात, मई में 10 और जून में 17 मामले दर्ज किए गए।

जुलाई के दौरान यह संख्या बढ़कर 26 हो गई। इसके बाद अगस्त में सबसे ज्यादा 44 सर्पदंश के मामले सामने आए। सितंबर में भी यह सिलसिला जारी रहा और 13 सितंबर तक 30 लोग सांप के काटने के बाद इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। इस तरह करीब नौ महीने में कुल 147 मामले दर्ज किए गए।

समय पर एंटी-वेनम मिलने से बची जान

जिला अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सर्पदंश के मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार एंटी-वेनम दिया गया। समय पर उपचार मिलने के कारण अधिकांश मरीजों की हालत में सुधार हुआ और उनकी जान बचाई जा सकी।

कुछ मरीजों की हालत गंभीर थी। ऐसे मामलों में जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेरठ के उच्च चिकित्सा केंद्र में भेजा गया।

अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार अखौरी ने बताया कि सर्पदंश के मामलों में जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है। समय पर एंटी-वेनम मिलने से गंभीर स्थिति को संभालने में काफी मदद मिलती है।

झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें

सर्पदंश के मामलों में सबसे बड़ी समस्या इलाज में देरी भी हो सकती है। कई ग्रामीण इलाकों में आज भी कुछ लोग सांप के काटने के बाद मरीज को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक या पारंपरिक उपचार कराने लगते हैं। इससे इलाज शुरू होने में महत्वपूर्ण समय निकल सकता है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सांप के काटने के बाद किसी तरह की झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें। मरीज को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल ले जाना चाहिए।

दो लोगों की हुई मौत

जनवरी से 13 सितंबर के बीच शामली जिले में सर्पदंश के दो मरीजों की इलाज के दौरान मौत हुई। इनमें कैराना क्षेत्र के गांव जगनपुर का एक व्यक्ति और कांधला क्षेत्र का एक बच्चा शामिल बताया गया है। वहीं, जिला अस्पताल पहुंचने वाले 145 मरीजों को समय पर उपचार मिलने से उनकी जान बचाई जा सकी।

बारिश के मौसम में बढ़ जाता है खतरा

बरसात के दौरान सर्पदंश के मामलों में वृद्धि एक गंभीर चिंता का विषय है। बारिश का पानी सांपों के प्राकृतिक ठिकानों में पहुंचने के कारण वे अक्सर सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में बाहर निकलते हैं। ऐसे में घरों, खेतों, झाड़ियों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

शामली के आंकड़े यह भी बताते हैं कि सर्पदंश की स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना और उचित चिकित्सा उपचार लेना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए सांप के काटने की स्थिति में घरेलू या झाड़-फूंक आधारित उपचार के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेना सबसे सुरक्षित कदम है।



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